फ़िल्म रिव्यू: जाति व्यवस्था की जमीनी हकीकत उजागर करती फ़िल्म "गुठली लड्डू"
13 Apr, 2024
पोस्टर: गुठली लड्डू
कहने को तो हम एक ऐसे समाज में रह रहे हैं जहां सभी का शिक्षा पर एक समान अधिकार है लेकिन इसकी असल हकीकत शायद कुछ और ही है और इसी हकीकत को बयां करती है इशरत खान द्वारा निर्देशित फिल्म "गुठली लड्डू"। भारत में ही ऐसी कई जगहें हैं जहां दलितों की स्थिति बद से बदतर है। 21 वीं सदी के इस भारत में लोग अभी भी निचली जाति के लोगों को छूने तक से परहेज़ करते हैं।
फ़िल्म शुरू होती है एक ऐसे बच्चे से जिसके मन में अनेकों सवाल हैं, दुनिया भर के सपनों को अपनी मुठ्ठी में भर लेने की ताकत है, लेकिन उचित शिक्षा व्यवस्था की कमी के कारण उसे पढ़ने का मौका नहीं मिलता है। इस बच्चे का नाम है गुठली(धनय सेठ), जो निचली जाति के परिवार से आता है। अछूत होने के कारण स्कूल में दाखिला न मिलने पर वह कक्षा के बाहर ही खिड़कियों पर खड़ा होकर पढ़ता है और ना सिर्फ़ अपना नाम लिखना सीखता है बल्कि गणित और विज्ञान से जुड़े तथ्यों की भी जानकारी रखता है।
फिल्म का एक दृश्य
गुठली की पढ़ाई के प्रति इस ललक को स्कूल का प्रिंसिपल हरिशंकर (संजय मिश्रा) बखूबी समझता है लेकिन सामाजिक पूर्वाग्रहों और कुरीतियों के कारण उसकी मदद करने में असहाय महसूस करता है। फ़िल्म में गुठली का एक दोस्त 'लड्डू' (हीत शर्मा), चुलुबुला सा बच्चा है, जिसे लड्डू पसंद है लेकिन पिता के साथ गंदगी उठाते समय सीवर में गिरकर उसकी मौत हो जाती है।
इस घटना के बाद गुठली के माता-पिता (कल्याणी मुले और सुब्रत दत्ता) गुठली को स्कूल में दाखिला दिलाने का प्रयास करते हैं और फिर कहानी में एक मोड़ आता है जिससे शिक्षा के समान अधिकार पर प्रश्न चिन्ह लगता दिखाई देता है। ये मोड़ क्या है? ये आपको फ़िल्म देखने पर ही पता चलेगा।
फ़िल्म का एक दृश्य
इस देश में लड्डू और गुठली जैसे लाखों बच्चें है, जो इस देश की गंदगी साफ़ करने में ही अपना बचपन खफा देते हैं। सरकार की हजारों योजनाओं के बाद भी उन तक उसका लाभ नहीं पहुंचता है। ये फ़िल्म न सिर्फ़ जाति व्यवस्था की सच्चाई उजागर करती है बल्कि उस पर प्रहार भी करती है।
अभिनय की बात करें तो गुठली यानि धनय सेठ का किरदार दर्शकों का दिल जीत लेता है,वहीं प्रिंसिपल की भूमिका में संजय मिश्रा दर्शकों पर एक अलग छाप छोड़ते हुए दिखाई देते हैं। हर बार की तरह इस बार भी संजय मिश्रा सामाजिक और संवेदनशील मुद्दे पर कवायद करते हुए नज़र आएं हैं।
Write a comment ...